दिन 3, 4, 5: मेहनत, धूम और वापसी की राह

नमस्कार पाठकों!

मेरी नागपुर यात्रा के आखिरी तीन दिन – 30 और 31 दिसंबर 2025, तथा 1 जनवरी 2026 – काम, थोड़ी खोजबीन और नए साल की ताज़गी से भरे रहे। फिर शुरू हुई वापसी की लंबी पर सुखद यात्रा। आइए, संक्षेप में सब कुछ बताता हूँ।

30 दिसंबर: काम का दिन और कैंपस की झलक

इन दिनों का मुख्य केंद्र था – पेपर मूल्यांकन! कुल मिलाकर 150 पेपर चेक हुए। दिन की शुरुआत एक ताज़गी भरी दौड़ से होती थी, जो एनर्जी देती थी। काम के बीच, नागपुर वेटरनरी कॉलेज के परिसर को नज़दीक से देखने का मौका मिला। कॉलेज 1960 के दशक में स्थापित हुआ था और यह महाराष्ट्र एनिमल साइंस एंड फिशरीज साइंस यूनिवर्सिटी (MAFSU) के पास है। परिसर में एक बहुत ही सुंदर और जानकारीपूर्ण म्यूज़ियम भी देखा। यहाँ मुझे भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के कुछ परिचितों से भी मिलने का अवसर मिला, जो एक सुखद संयोग था।

31 दिसंबर: नए साल की पूर्वसंध्या

काम पूरा करने के बाद, शाम को नारियल पानी पीकर ताज़गी बढ़ाई। नए साल का जश्न शांत और सादगी भरा रहा। एक अलग शहर में नया साल शुरू करने का अपना ही एक अनोखा अहसास था।

1 जनवरी: नए साल की धमाकेदार शुरुआत और नागपुर भ्रमण

नए साल के पहले दिन की शुरुआत हुई एक लंबी दौड़ से – लगभग 2.5 किलोमीटर दूर स्थित एक बाल उद्यान तक। यह दौड़ ताज़गी और उत्साह से भरपूर थी।

दिन के अंत में, देर शाम मैं नागपुर के दो प्रमुख स्थलों पर गया:

  1. दीक्षाभूमि: डॉ. बी.आर. अंबेडकर से जुड़ा यह ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण स्थल, जहाँ का वातावरण गंभीर और प्रेरणादायक था।
  2. एक सुंदर झील: शहर की भागदौड़ से दूर, पानी के किनारे की शांति ने दिन को शानदार समापन दिया।

वापसी का सफर: ट्रेन, दिल्ली और अंततः पालमपुर

शाम लगभग 8:30 बजे, मैं नागपुर से दिल्ली के लिए समय पर आई राजधानी एक्सप्रेस में सवार हो गया। डिनर के बाद आराम से सो गया। ट्रेन 10:30 बजे दिल्ली पहुँचनी थी, लेकिन लगभग 12 बजे पहुँची।

2 जनवरी: दिल्ली में भाई से मुलाकात और अंतिम पड़ाव

दिल्ली पहुँचकर मैं सीधे मेट्रो से भाई से मिलने गया। हमने सदर बाज़ार का रुख किया – यह एक बड़ा होलसेल मार्केट है, जहाँ सूखे मेवे, कपड़े और तरह-तरह के सामान की भरमार है। शाम तक, वापसी की तैयारी पूरी हो गई।

शाम को मैंने कश्मीरी गेट आईएसबीटी के प्लेटफॉर्म नंबर 52 से वापस पालमपुर के लिए वॉल्वो बस पकड़ी (टैक्सी लेकर वहाँ पहुँचा)। रात 10:15 बजे बस शिवा ढाबा, मुरथल पर रुकी, जहाँ मैंने एक प्रीमियम थाली और स्वादिष्ट खीर का आनंद लिया। अगली सुबह 8 बजे, बस ने मुझे (VMRT), पालमपुर पर उतार दिया।

और इस तरह, ऑफिशियल काम, नए शहर की सैर, नए साल का जश्न और एक लंबी यात्रा से भरा यह सफ़र अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँचा। थकान थी, पर अनुभवों का ख़ज़ाना भी साथ था।

इस सफ़र से की गई सीख:

  • हर शहर की अपनी एक ख़ास छाप और इतिहास होता है, उसे जानने का प्रयास ज़रूर करें।
  • व्यस्त कार्यक्रम में भी थोड़ा समय निकालकर स्थानीय स्थल देखने से यात्रा संपूर्ण होती है।
  • भारतीय रेल और रोडवेज़ का नेटवर्क विशाल और विश्वसनीय है, बस थोड़ा धैर्य चाहिए।

आशा है आपको मेरी यात्रा का यह विवरण पसंद आया। अगली यात्रा तक, नमस्कार!

– आपका यात्री मित्र

Dr Devesh Thakur

Leave a Comment