प्रातःकाल: प्रकृति की गोद में
सबसे पहले, सुबह हल्की-हल्की बारिश के बीच दिन की शुरुआत सैर से हुई। इस दौरान, ठंडी हवा और मिट्टी की सोंधी खुशबू ने मन को तरोताज़ा कर दिया। तत्पश्चात, लौटकर अतिथि गृह में Livestock Economics का अध्ययन किया। वास्तव में, शांत वातावरण में पढ़ाई करने का अलग ही आनंद था। परिणामस्वरूप, आगामी कार्यों की अच्छी तैयारी हो गई।
विभाग में साथियों से मुलाकात
इसके बाद, पूर्वाह्न में पशु चिकित्सा प्रसार (Veterinary Extension) विभाग पहुँचा। वहाँ, अपने सहयोगियों डॉ. संजीव कुमार सिंह और डॉ. प्रतीक्षा पांडा से मुलाकात हुई।
इसके अलावा, काफी समय बाद मिलकर कार्य, शोध और विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर सार्थक चर्चा हुई। तत्पश्चात, विद्यार्थियों की वाइवा परीक्षा का कार्य आरंभ हुआ। यह कार्य दोपहर के भोजन और चाय के अवकाश के साथ शाम 5:30 बजे तक चला। निस्संदेह, विद्यार्थियों का आत्मविश्वास, उनकी तैयारी और सीखने की उत्सुकता देखकर एक शिक्षक के रूप में संतोष की अनुभूति हुई।
सायंकालीन आध्यात्मिक यात्रा – रमण रेती, गोकुल
सायंकालीन आध्यात्मिक यात्रा – रमण रेती, गोकुलदिनभर के शैक्षणिक कार्यों के बाद शाम को रमण रेती, गोकुल जाने का सौभाग्य मिला।रमण रेती मथुरा से कुछ किलोमीटर दूर स्थित एक अत्यंत पावन स्थान है।
मान्यता है कि यही वह भूमि है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम तथा ग्वाल-बाल अपनी बाल लीलाएँ किया करते थे।
इसी पवित्र रेत पर श्रीकृष्ण ने राधारानी के साथ अनेक मधुर क्षण बिताए और यहीं से वृंदावन की ओर प्रस्थान किया था।आज भी यहाँ की रेत, वृक्ष और वातावरण उन दिव्य लीलाओं की अनुभूति कराते हैं।
विशाल परिसर में मंदिर, हिरण अभयारण्य, साधु-संतों के विश्राम स्थल और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं।रमण रेती के समीप स्थित कर्ष्णि आश्रम का भी दर्शन किया। यहाँ स्थित प्राचीन रमण बिहारी जी मंदिर 18वीं शताब्दी के संत ज्ञानदास जी की तपस्या से जुड़ा हुआ है।
कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें इसी स्वरूप में दर्शन दिए थे, और उसी स्वरूप की प्रतिमा आज भी यहाँ विराजमान है।मंदिर में आरती, भक्तों की श्रद्धा, हाथी का आशीर्वाद और चारों ओर गूंजते “राधे-राधे” के स्वर मन को अद्भुत शांति प्रदान कर रहे थे।
ऐसा लगा जैसे दिनभर की सारी थकान यहीं आकर समाप्त हो गई हो।—
आज की झलकियाँ
1. रमण रेती का शांत परिसरपेड़ों की छाँव में श्रद्धालु, साधु और भक्तों से भरा आध्यात्मिक वातावरण।

2. हाथी का आशीर्वाद मंदिर परिसर में सजे हुए हाथी के साथ श्रद्धा और आनंद के अविस्मरणीय पल।


3. श्री रमण बिहारी जी के दर्शन

प्रभु के समक्ष कृतज्ञता”दिन का समापन इस अनुभूति के साथ हुआ कि ज्ञान मन को विकसित करता है, लेकिन भक्ति उसे पूर्णता प्रदान करती है।” 🙏🌿
आज की सीख
दिन की शुरुआत प्रकृति के साथ हो तो पूरे दिन ऊर्जा बनी रहती है।
अध्ययन और अध्यापन दोनों ही जीवनभर चलने वाली साधनाएँ हैं।
सहयोगियों से संवाद ज्ञान को समृद्ध करता है।
व्यस्त जीवन में आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा मन को संतुलन और शांति देती है।
रमण रेती की पावन रेत यह संदेश देती है कि सादगी, भक्ति और प्रेम ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हैं।—📸