29–30 जून
सबसे पहले, 29 जून की शाम 8:45 बजे मैंने सीएसकेएचपीकेवी के गेट नंबर 5 से वोल्वो बस में अपनी यात्रा शुरू की। इसके बाद, रात लगभग 12 बजे मुझे नींद आ गई। उससे पहले, बस ऊना में लगभग 30 मिनट के लिए रात के खाने हेतु रुकी।
मैं बस से केवल वॉशरूम जाने के लिए उतरा। हालाँकि, यह देखकर आश्चर्य हुआ कि आधी रात को भी लोग आराम से भोजन कर रहे थे। तब महसूस हुआ कि यात्रा की अपनी अलग घड़ी होती है, जहाँ समय का अर्थ बदल जाता है।
अगली सुबह, 6:40 बजे मेरी आँख खुली तो बस दिल्ली पहुँच चुकी थी।
दिल्ली का सफर और परिवार से मुलाकात
सबसे पहले, मैं ओवरब्रिज पार करके आईएसबीटी मेट्रो स्टेशन पहुँचा। वहाँ से, ₹21 का टिकट लेकर नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पहुँचा। फिर, ₹21 में एयरपोर्ट मेट्रो से द्वारका गया। वहाँ, मेरे भाई मुझे लेने आए। साथ ही, नाश्ता किया और कुछ देर आराम किया।
इसके बाद, मैं फिर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लौटा। तत्पश्चात, दोपहर का भोजन किया और दोपहर 1 बजे मथुरा जाने वाली ट्रेन में सवार हुआ। अंततः, मथुरा पहुँचकर स्थानीय वाहन से डीयूवीएएसयू के अतिथि गृह पहुँचा।
मथुरा: पुराने मित्र और नई ऊर्जा
गेस्ट हाउस पहुँचने के बाद एक सुखद आश्चर्य मेरा इंतज़ार कर रहा था। वास्तव में, मेरा पुराना मित्र जे.के. मुझसे मिलने आया। इसके अलावा, वर्षों बाद हुई मुलाकात ने पुरानी यादों को ताज़ा कर दिया। बाद में, अमित सिंह से भी मुलाकात हुई। अंत में, शाम को गेस्ट हाउस लौटकर दूध पिया।
फिर भी, इतनी लंबी यात्रा के बाद भी मैंने दिन का समापन केवल आराम करके नहीं किया। इसके विपरीत, टहलने गया, जिम में समय बिताया और बैडमिंटन खेला। परिणामस्वरूप, इन गतिविधियों ने पूरे दिन की थकान दूर कर दी और मन में नई ऊर्जा भर दी। निस्संदेह, महसूस हुआ कि शरीर को सक्रिय रखने से मन भी प्रसन्न रहता है।
इस यात्रा से मिली सीख
- यात्रा हमें धैर्य रखना सिखाती है। हर मंज़िल अपने समय पर मिलती है।
- परिस्थितियाँ बदलने पर लोगों की दिनचर्या भी बदल जाती है। आधी रात का भोजन भी किसी के लिए सामान्य हो सकता है।
- परिवार का साथ, चाहे कुछ समय के लिए ही क्यों न हो, यात्रा को सहज और सुखद बना देता है।
- पुराने मित्रों से मुलाकात जीवन में नई ऊर्जा और अपनापन भर देती है।
- लंबी यात्रा के बाद भी यदि हम थोड़ा व्यायाम या खेल के लिए समय निकालें, तो शरीर और मन दोनों तरोताज़ा हो जाते हैं।
- यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचना नहीं है, बल्कि नए अनुभवों, रिश्तों और स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर भी है।
दिन के अंत में जब मैं गेस्ट हाउस में विश्राम करने पहुँचा, तब यह एहसास हुआ कि यह केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत थी—जिसमें परिवार का स्नेह, मित्रों का साथ, स्वास्थ्य का महत्व और नए अनुभवों का उत्साह सब एक साथ जुड़े हुए थे।
यात्रा जारी है…